समान नागरिक संहिता।

भारत के उत्तराखंड राज्य में "समान नागरिक संहिता" को 28 जनवरी 2025 से लागू कर दिया गया है। समान नागरिक संहिता को "यूनिफॉर्म सिविल कोड" (Uniform Civil Code) भी कहा जाता है। UCC लागू होने के बाद सभी धर्म, जाति और समुदायों के लिए कानून का एक प्रावधान होगा, यानी एक कानून और एक न्याय होगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 1835 में ब्रिटिश शासक ने समान नागरिक संहिता का जिक्र किया था और कहा था कि सभी धर्म, जाति, समुदाय और वर्गों के अपराधों के मध्यनजर एक कानून होना चाहिए। रिपोर्ट में यह स्पष्ट था कि यदि ऐसा कोई कानून लागू किया जाता है, तो चाहे वह हिन्दू हो या मुस्लिम, सिख हो या पारसी, किसी भी धर्म के निजी कानूनों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

UCC कितने राज्यों में लागू है?

गोवा में "गोवा सिविल कोड" लागू है। 1869 में गोवा पुर्तगाल के कब्जे में था, पुर्तगाल ने 1867 में इस कानून को बनाया था और 1869 से इसे लागू किया था। दिसंबर 1961 में गोवा पुर्तगाल से आजाद हुआ और भारत का हिस्सा बना। भारत का हिस्सा बनने के बाद कई नियमों में बदलाव किया गया। लेकिन, गोवा सिविल कोड को गोवा, दमन एंड दिउ एडमिनिस्ट्रेशन एक्ट, 1962 के 5(1) में जगह दे दी गई थी। जिससे यह कहा जा सकता है कि 1962 से ही UCC भारत के गोवा राज्य में लागू किया जा चुका है।

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता कब लागू हुआ था?

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 27 जनवरी 2025 की दोपहर 12:30 बजे "समान नागरिक संहिता" को लागू कर दिया था। साथ में यूनिफॉर्म सिविल कोड के वेबपोर्टल को भी लांच किया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा चुनाव के दौरान लोगों से वादा किया था कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी तो सबसे पहले "समान नागरिक संहिता" कानून को लागू किया जाएगा।

भाजपा की सरकार बनने के बाद सबसे पहले एक कैबिनेट बैठक हुई, बैठक में एक समिति का गठन किया गया, समिति को यूनिफॉर्म सिविल कोड के सभी औपचारिकताओं को सौंपा गया। उम्मीद किया जाने लगा था कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर सबसे पहले देवभूमि में UCC को लागू किया जाएगा। लेकिन, नगर निकाय चुनाव के कारण आचार संहिता लागू हो गया था।

पुष्कर सिंह धामी को निर्वाचन आयोग से कैबिनेट बैठक के लिए अनुमति लेना पड़ा था। 20 जनवरी 2025 को CM धामी की अध्यक्षता में सुबह 10 बजे सचिवालय में एक कैबिनेट बैठक हुई, बैठक में UCC नियमावली को मंजूरी मिल गई। हालांकि, UCC समिति अक्टूबर में ही सरकार को नियमावली सौंप दी थी, नियमावली का परीक्षण कराया गया था, कुछ संशोधन भी किया गया था, उसके बाद कैबिनेट ने मंजूरी दी थी।

"यूनिफॉर्म सिविल कोड" क्या है?

यूनिफॉर्म सिविल कोड, यानि "समान नागरिक संहिता", ऐसा कानून है, जो सभी धर्म, जाति और समुदाय के लोगों पर समान रूप से लागू होता है। इसका मुख्य उद्देश्य विवाह, संपत्ति और उत्तराधिकार इत्यादि मामलों पर नागरिकों के बीच समानता लाना है, जिससे लोगों के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाए।

UCC का महत्व क्या है?

भारतवर्ष में वर्तमान में सभी धर्मों के लिए अलग-अलग कानून लागू हैं। एकमात्र राज्य उत्तराखंड है, जहां 28 जनवरी 2025 को 'UCC' लागू किया गया है। अगर इसे भारत के सभी राज्यों में प्रयुक्त किया जाता है, तो धार्मिक आधार पर हो रहे भेदभाव पूरी तरह खत्म हो जाएगा। अभी.....

  • हिन्दू धर्म में विवाह-संस्कार, संपत्ति, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों के लिए हिन्दू पर्सनल लॉ बनाया गया है। इसमें जैन, सिख और बौद्ध धर्म भी शामिल हैं।
  • इस्लाम शरीयत के लिए निकाह, तलाक, और विरासत को लेकर एक मुस्लिम पर्सनल लॉ बनाया गया है।
  • ईसाई और पारसी धर्म के लिए भी पर्सनल कानून बनाया गया है।

भारतीय संविधान में UCC का जिक्र कैसे हुआ था?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में "समान नागरिक संहिता" को लेकर एक प्रावधान है, जिसमें इस बात का जिक्र है कि UCC को लागू करने के लिए राज्य पूरी तरह स्वतंत्र है। लेकिन यह एक "निदेशक सिद्धांत" है, यानी यह राज्यों पर निर्भर करता है कि उन्हें इस कानून को लागू करने का प्रयास करना चाहिए या नहीं।

अनुच्छेद 44 - भारतीय संविधान के भाग 4 (निदेशक सिद्धांत) का एक महत्वपूर्ण अनुच्छेद है, जिसमें यह कहा गया है कि राज्य को भारत में एक "समान नागरिक कानून" लागू करना चाहिए, जिससे देश में सभी नागरिकों के लिए विवाह, संपत्ति, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने से संबंधित समान कानून रहे। हालांकि, इसे लागू करने के लिए व्यापक सहमति और संवेदनशीलता की जरूरत होगी, क्योंकि इससे किसी समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

अनुच्छेद 44 का मुख्य उद्देश्य:

  • सभी धर्म, जाति और समुदाय के लिए एक कानूनी समानता स्थापित करना है।
  • महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार देना है।
  • पर्सनल लॉ के कारण होने वाले भेदभाव को खत्म करके राष्ट्रीय एकता और एकरूपता सुनिश्चित करना है।

UCC के फायदे और नुकशान क्या हैं?

  • लाभ - देश के सभी नागरिकों के लिए समान कानून होगा, जिससे भेदभाव खत्म होगा और समानता एवं न्याय मिलेगा।
  • लाभ - समान कानून होने से राष्ट्र और समाज की एकता मजबूत होगी।
  • हानी - UCC के लागू होने से महिलाओं के अधिकारों में कमी होगी, ऐसा कई पर्सनल लॉ का दावा है।
  • हानी - कुछ समुदायों को लगता है कि इसमें सामाजिक अस्थिरता आएगी।
  • हानी - कुछ समुदायों को लगता है कि इससे उनके धार्मिक परंपराओं में दखल होगा।