प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केदारनाथ रोपवे के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। केंद्रीय कैबिनेट बैठक में केदारनाथ रोपवे के साथ हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना के निर्माण को भी हरी झंडी मिल गई है। नरेंद्र मोदी ने 21 अक्टूबर 2022 को केदारनाथ रोपवे का शिलान्यास किया था। अक्टूबर 2025 में दोनों परियोजनाओं का निर्माण कार्य शुरू कर देने का लक्ष्य था।
अदानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को केदारनाथ रोपवे के निर्माण की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बन जाने के बाद 9 घंटे की दूरी सिर्फ 40 मिनट में पूरीहोगी। इस परियोजना को अधिकतम 6 वर्षों में तैयार करने का लक्ष्य है। पहला रोपवे प्रोजेक्ट - उत्तराखंड के सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 12.9 किलोमीटर लंबा होगा। इसे लगभग 4081 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाएगा। दूसरा रोपवे प्रोजेक्ट - गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक कुल 12.4 किलोमीटर लंबा होगा। इसे लगभग 2730 करोड़ की लागत से बनाया जाएगा।
केदारनाथ रोपवे से सुविधा
- केदारनाथ रोपवे का निर्माण हाईटेक टेक्नोलॉजी के आधार पर किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को ऐसे डिजाइन किया जाएगा, ताकि हर रोज लगभग 18 हजार श्रद्धालु केदारनाथ धाम का दर्शन कर सकें।
- केदारनाथ रोपवे बन जाने के बाद, तीर्थयात्री सिर्फ 40 मिनट में केदारनाथ का दर्शन करेंगे। अभी दर्शन करने में 8 से 9 घंटे का समय लगता है।
- यह पर्यावरण के अनुकूल होगा और तीव्र कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इस रोपवे के माध्यम से प्रति घंटा 1800 श्रद्धालु आसानी से यात्रा करेंगे।
हेमकुंड रोपवे का फायदा
उत्तराखंड के चमोली जिले में हेमकुंड साहिब रोपवे प्रोजेक्ट मैदानी स्तर से लगभग 15 हजार फीट की ऊंचाई पर तैयार होने जा रहा है। इसे खास तरीके से डिजाइन किया जाएगा, जिससे प्रति घंटा प्रति दिशा लगभग 1100 श्रद्धालुओं को दर्शन स्थल पहुंचाया जाएगा।
हेमकुंड साहिब में एक प्रसिद्ध गुरुद्वारा है। इस गुरुद्वारे को मई से सितंबर महीने के बीच खोला जाता है। हर साल यहां लगभग 2 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। रोपवे बन जाने के बाद श्रद्धालुओं की भीड़ और ज्यादा बढ़ेगी।
कठिन यात्रा से मिलेगी राहत
केदारनाथ पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को गौरीकुंड से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी तय करनीहोती है। मौजूदा समय में श्रद्धालु हेलीकॉप्टर, पालकी, और पैदल यात्रा करते हैं। रोपवे बन जाने से भक्तों को दर्शन करने में काफी राहत मिलेगी।
समुद्र तट से 12 हजार फुट की ऊँचाई पर स्थित यह स्थल 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। अभी अक्षय तृतीया से दीपावली तक लगभग 6 से 7 महीने तक कपाट खुले रहते हैं। हर साल लगभग 20 लाख भक्त दर्शन करते हैं।
12.9 किमी लंबे रोपवे में होंगे 5 स्टेशन
केदारनाथ रोपवे में कुल 22 टावर और 5 स्टेशन होंगे। सोनप्रयाग और केदारनाथ प्रमुख स्टेशन होंगे,जबकि गौरीकुंड, चिरबासा और लिनचोली तकनीकी स्टेशन होंगे, जिन्हें आपातकाल की स्थिति में प्रमुखता के साथ इस्तेमाल किया जाएगा। सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे निर्माण के लिए 26 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। पहले चरण में गौरीकुंड से केदारनाथ 9.7 किलोमीटर, जबकि दूसरे चरण में सोनप्रयाग से गौरीकुंड 3.3 किलोमीटर लंबा रोपवे का निर्माण किया जाएगा।
