महाकुंभ 2025 की तस्वीर।

प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक महाकुंभ का आयोजन किया गया था। देश-विदेश से लाखों की संख्या में भक्त प्रतिदिन पहुंच रहे थे। पहले शाही स्नान के दिन 3 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई थी। महाकुंभ संगम क्षेत्र पहुंचने के लिए आपको रास्ते की पूरी जानकारी होनी चाहिए।

प्रयागराज संगम क्षेत्र पहुंचने का मार्ग 

प्रयागराज पहुंचने के लिए आप तीन तरह के मार्ग का उपयोग कर सकते हैं।

पहला - सड़क मार्ग

प्रयागराज पहुंचने के लिए 7 महत्वपूर्ण रास्ते हैं। पहला अयोध्या रोड, दूसरा जौनपुर रोड, तीसरा वाराणसी रोड, चौथा मीरजापुर रोड, पांचवां लखनऊ रोड, छठा कानपुर रोड, और सातवां चित्रकूट-रीवा रोड। सभी सातों सड़क के प्रवेश द्वार से संगम क्षेत्र तक पहुंचने के लिए ऑटो, ई-रिक्शा, कैब, बसें, और अन्य वाहनों की सुविधा उपलब्ध हैं।

दूसरा - रेल मार्ग

प्रयागराज में कुल 9 रेलवे स्टेशन हैं, जिनमें प्रयागराज जंक्शन सबसे प्रमुख है, लेकिन संगम की दूरी लगभग 12 किलोमीटर है। प्रयागराज के सभी 9 स्टेशनों से प्रतिदिन 100 से भी ज्यादा ट्रेनें गुजरती हैं। इसके अलावा, विभिन्न शहरों से आने वाली ट्रेनों के माध्यम से भी आप प्रयागराज पहुंच सकते हैं।

प्रयागराज में मौजूद प्रमुख रेलवे स्टेशन

  1. प्रयागराज जंक्शन
  1. फाफामऊ जंक्शन
  1. प्रयाग जंक्शन
  1. प्रयागराज संगम
  1. झूंसी
  1. प्रयागराज छिंवकी
  1. नैनी जंक्शन
  1. प्रयागराज रामबाग
  1. सूबेदार गंज

भारतीय रेलवे ने महाकुंभ के दौरान 3000 से ज्यादा विशेष ट्रेनोें को चलाया था। प्रयागराज पहुंचने के बाद सड़क मार्ग के माध्यम से ई-रिक्शा, ऑटो और अन्य वाहनों के जरिए आप संगम क्षेत्र पहुंच सकते हैं।

तीसरा - विमान मार्ग

प्रयागराज पहुंचने के लिए दिल्ली, बॉम्बे, कोलकाता और अन्य कई प्रमुख शहरों से विशेष एयर विमान चलाए जा रहे थे। एयरपोर्ट से संगम की दूरी लगभग 21 किलोमीटर है। प्रयागराज संगम क्षेत्र पहुंचने के लिए यहां भी सड़क और रेल मार्ग के साथ ऑटो, ई-रिक्शा, कैब और बसें चलाई जा रही थीं।

प्रयागराज संगम क्षेत्र में मौजूद पवित्र घाट

  • प्रयागराज संगम में स्नान करने के लिए मुख्य रूप से 8 घाट मौजूद हैं। लेकिन महाकुंभ को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने कुछ अस्थायी घाट बनाए थे। संगम के किनारे लगभग 12 किलोमीटर लंबा क्षेत्र में अस्थायी घाट बनाए गए थे।
  • संगम घाट - संगम घाट को सबसे पवित्र घाट माना जाता है। गंगा और यमुना के संगम पर स्नान का विशेष महत्व है। संगम घाट के सबसे करीब वाले पवित्र दर्शनीय स्थलों का नाम अक्षयवट (हनुमान मंदिर) और शंकर विमान मंडपम है।
  • दशावश्रमेध घाट - यह घाट 110 मीटर लंबा और 95 मीटर चौड़ा है। इस घाट पर बैठने की व्यवस्था, कपड़े बदलने की व्यवस्था, पार्किंग और अन्य कई प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
  • किला घाट - यमुना नदी के तट पर स्थित इस घाट की लंबाई 60 मीटर और चौड़ाई 70 मीटर है। जब श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है, तब इस घाट पर आकर भक्त स्नान करते हैं।
  • सरस्वती घाट - सरस्वती घाट की लंबाई 30 मीटर और चौड़ाई 60 मीटर है। यह घाट पूरी तरह कंक्रीट का बना हुआ है। इस घाट के सबसे करीब पवित्र प्राचीन मनकामेश्वर मंदिर है। दैनिक दिनचर्या में हजारों भक्त यहां दर्शन के लिए जाते हैं।

इसके अलावा बलुआ घाट और काली घाट, जो यमुना नदी के किनारे हैं।

गंगा नदी के किनारे छतनाग घाट, नागेश्वर घाट, मौजगिरी घाट, महेवा घाट और नारायण आश्रम घाट हैं।