दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 की तारीख के ऐलान कि तस्वीर।

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का ऐलान कर दिया था। दिल्ली में 5 फरवरी 2025 को एक चरण में कुल 70 विधानसभा सीटों पर मतदान करायागयाथा। 1.5 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के लिए 33 हजार 330 पोलिंग बूथ बनाए गए थे, जिसमें लगभग 83.50 लाख पुरुष और 70.50 लाख महिलाओं ने मतदान किया था। वहीं, 2 लाख से ज्यादा नए वोटरों ने मतदान किया था। नामांकन की प्रक्रिया 10 जनवरी से 17 जनवरी तक की गई थी,जबकि नाम वापस लेने की प्रक्रिया 20 जनवरी को समाप्त हुई थी।

दिल्ली विधानसभा चुनाव के तारीख की घोषणा के दिन CEC का डेढ़ घंटा प्रेस कॉन्फ्रेंस चला था। प्रेस वार्ता में उन्होंने EVM, वोटर लिस्ट में धांधली, वोटर्स के नाम हटाने के आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। विपक्षी नेताओं की तरफ से लगाए गए आरोपों पर उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले चुनावी प्रक्रिया पर आरोप लगाना ठीक नहीं है, सुप्रीम कोर्ट EVM से संबंधित आरोपों को पहले ही खारिज कर चुकी है।

चुनावी प्रक्रिया पर विपक्षी नेताओं का आरोप

  • पूर्व CM अरविंद केजरीवाल और मौजूदा CM अतिशी ने 29 दिसंबर 2024 को चुनाव आयोग पर आरोप लगाया था कि नई दिल्ली विधानसभा सीट से 5 हजार वोटरों के नाम काट दिए गए हैं। कांग्रेस के नेताओं ने भी आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद हर निर्वाचन क्षेत्र में 10 हजार से ज्यादा वोटरों के नाम हटाए और जोड़े गए।

  • अक्टूबर 2024 में हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी ने आयोग पर EVM हैक होने का आरोप लगाया था। 2017 में केजरीवाल ने कहा था कि EVM हैक करने का दस तरीका मैं बता सकता हूं।

  • कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान शाम पांच बजे के बाद वोटिंग प्रतिशत का आंकड़ा अचानक कैसे बढ़ गया था।

  • पोलिंग बूथ की CCTV रिकॉर्डिंग पब्लिक डोमेन में क्यों नहीं लाई जाती हैं? 24 दिसंबर 2024 को कांग्रेस ने केंद्र सरकार द्वारा 20 दिसंबर को बदले गए CCTV, रिकॉर्डिंग इत्यादि के इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज को सार्वजनिक रूप से न शेयर करने के नियम के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट को चुनौती दी थी।

  • महाराष्ट्र चुनाव के दौरान आयोग के अधिकारियों ने उद्धव ठाकरे का बैग जांचा था, जिस पर उन्होंने टिप्पणी की थी कि मोदी और अमित शाह के बैगों की भी जांच होनी चाहिए।

विपक्ष के आरोपों पर CEC का जवाब

पहला जवाब:

CEC ने कहा, प्रति वर्ष जनवरी में सर्वे होता है और प्रक्रिया अक्टूबर में शुरू की जाती है। नए वोटर्स जुड़ते-हटते हैं, इसके लिए ड्राफ्ट रोल की 2 कॉपी दी जाती हैं। हर गांव और शहर में ड्राफ्ट रोल और ऑब्जेक्शन की कॉपी दी जाती है। डिलीशन व्यक्तिगत सुनवाई के बगैर नहीं किया जाता है, पोलिंग बूथ पर अधिकारी खुद जाकर चेक करते हैं।

दूसरा जवाब:

वोटिंग की तारीख से 7 या 8 दिन पहले एजेंट के सामने सिंबल डाला जाता है, बैटरी डाली जाती हैं और EVM पर सील लगाई जाती हैं। वोटिंग के दिन सील तोड़ीजाती है। सबसे पहले सिरियल नंबर चेक होता है, एजेंट के सामने मॉक पोल होता है, फिर वोटिंग शुरू होती है। एजेंट को वोटिंग का आंकड़ा पोलिंग के खत्म होने के बाद बतायाजाता है। एजेंट के सामने EVM को स्टोर रूम में लाई जाती हैं और ताला लगाया जाता है। फिर ताले को काउंटिंग के दिन ही खोला जाता है।

तीसरा जवाब:

ग्लोबल एक्सपर्ट का कहना है कि हमें काउंटिंग करने में एक से डेढ़ महीना लगता है, लेकिन भारत एक दिन में परिणाम कैसे जारी कर देता है। जिस पर राजीव कुमार ने कहा था कि वहां EVM होता ही नहीं है। 5 और 7 बजे के बीच अफसर आते हैं, अगर वोटर लाइन में होते हैं, तो उन्हें वोटिंग के लिए रोक दिया जाता है, 17 सी हाथ से लिखते हैं, एजेंट से सील कराते हैं। हमसे कहते हैं कि वोट प्रतिशत शाम 5 बजे के बाद बढ़ा दिया जाता है, तो आप बताएं कि 6 बजे पोलिंग बंद कराएं, EVM और मशीन सील कराएं या बताएं कि वोट कितना हुआ है।

चौथा जवाब:

रिकॉर्डिंग जानकारी इसलिए नहीं दी जाती है क्योंकि पारदर्शिता हमारा मूलभूत आधार है। मतदाता के प्रोफाइल और प्राइवेसी को लेकर नियम बदला गया है। एक विधानसभा क्षेत्र में लगभग 1800 बूथ होते हैं; 5 घंटे देखोगे तो 325 साल लगेंगे। जो लोग इसे दिखाने की बात करते हैं, उनका इरादा सिर्फ मिसयूज करना होता है।

पांचवां जवाब:

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा, चेकिंग सिर्फ नेताओं की नहीं बल्कि आयोग के अधिकारियों की भी की जाती है।