दिल्ली विधानसभा चुनाव में सभी 70 सीटों पर 5 फरवरी 2025 को वोटिंग समाप्त हो गई थी। चुनाव में लगभग 61 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, जो दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 की तुलना में 2 प्रतिशत कम थी। सबसे ज्यादा नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में 66.25 प्रतिशत और सबसे कम साउथ-ईस्ट दिल्ली में 56.31 प्रतिशत मतदान हुआ था।
इसके साथ ही दो राज्य उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में 2 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराया गया था। उत्तर प्रदेश के मिल्कीपुर सीट पर 65.35 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि तमिलनाडु के इरोड ईस्ट सीट पर 67.97 प्रतिशत मतदान हुआ था।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 का आंकड़ा
- दिल्ली विधानसभा चुनाव के पिछले 2 बार के चुनावों के आंकड़ों को समझें तो 2015 और 2020 के मुकाबले 2025 में 2 प्रतिशत लोगों ने कम मतदान किया था। पिछले दोनों चुनावों में आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल की थी।
- 2015 में कुल 67.12 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, 2020 में 62.59 प्रतिशत और 2025 में लगभग 61 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। भारतीय चुनाव आयोग के अनुसार, भाजपा ने 2015 में 03 और 2020 में 08 सीटों पर विजय प्राप्त की थी, दोनों वर्ष कांग्रेस का खाता नहीं खुल पाया था।
- आम आदमी पार्टी (AAP) ने 2015 में 67 और 2020 में 62 सीटों पर जीत प्राप्त की थी और दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी थी।
दिल्ली विधानसभा चुनाव क्षेत्रों का वोट प्रतिशत
- सेंट्रल दिल्ली—59.09%
- नई दिल्ली - 57.13%
- नॉर्थ दिल्ली - 59.55%
- साउथ दिल्ली - 58.16%
- ईस्ट दिल्ली - 62.40%
- वेस्ट दिल्ली—60.76%
- नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली—66.25%
- नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली—60.70%
- साउथ-ईस्ट दिल्ली - 56.31%
- साउथ-वेस्ट दिल्ली - 61.09%
- शाहदरा - 63.94%
- कुल - 60.44 प्रतिशत
AAP ने अपना वोट प्रतिशत कैसे बढ़ाया था?
- आम आदमी पार्टी (AAP) ने सिर्फ 2 साल में अपने वोट प्रतिशत को लगभग 30 से 55 प्रतिशत तक की ऊँचाई पर पहुंचाया।
- 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर वर्ष 2012 में अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी (AAP) का गठन किया था। दिल्ली विधानसभा चुनाव में लगभग 1 साल का समय था।
- 4 दिसंबर 2013 को दिल्ली विधानसभा चुनाव हुआ, जिसमें आम आदमी पार्टी को 29.49 प्रतिशत वोट के साथ कुल 28 सीटों पर जीत मिली थी।
- उस समय दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित थीं, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने नई दिल्ली सीट पर उनको लगभग 26,000 वोट से मात दिया था।
- केजरीवाल को लगभग 54 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि शीला दीक्षित को मात्र 23 प्रतिशत।
BJP के वोट प्रतिशत का आकड़ा
- दिसंबर 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 33.07% वोट शेयर के साथ 31 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी, लेकिन 5 सीट कम होने की वजह से बहुमत नहीं मिल पाई और AAP ने कांग्रेस के साथ गठबंधन बनाकर सरकार बना लिया था। लेकिन 2 महीने में ही सरकार गिर गई और 1 साल तक दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा रहा।
- 2015 में भाजपा का वोट प्रतिशत 32.19 प्रतिशत रहा, जबकि 2020 में 38.51 प्रतिशत। लेकिन, 2015 में 3 सीट और 2020 में वोट शेयर बढ़ने के बावजूद भी भाजपा मात्र 8 सीट ही जीत पाई थी।
- इस प्रकार 2013 से 2020, 7 वर्षों में भाजपा ने मात्र 6 प्रतिशत वोट बनाया, जबकि सीटों के मामले में 31 से घटकर 8 पर पहुंच गया।
कांग्रेस का वोट प्रतिशत का आकड़ा
- 2013 में कांग्रेस का वोट शेयर प्रतिशत लगभग 25 था, और उस समय यह पार्टी कुल 8 सीटें जीती थी। दिल्ली में 1998 से 2013 तक कांग्रेस पार्टी की सरकार रही थी।
- 2015 में कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर मात्र 10 प्रतिशत रहा था और एक भी सीट नहीं जीत पाई थी।
- वहीं, 2020 में पार्टी की हालत और बिगड़ गई, मात्र 4.26 प्रतिशत वोट शेयर रहा और सीट फिर से जीरो पर ही सिमट गई।
