सीबीएसई बोर्ड परीक्षा नियम बदला।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 10वीं बोर्ड परीक्षा के नियमों में बदलाव किया है। वर्ष 2026 से CBSE बोर्ड कक्षा 10वीं की परीक्षा साल में दो बार आयोजित कीजाएगी। छात्रों के शैक्षणिक अनुभव में सुधार लाने और परीक्षा में होने वाले तनाव को कम करने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया था।

नए नियम के अनुसार, छात्रों को स्कूल में 75 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करना होगा। 75 प्रतिशत उपस्थिति छात्रों को नियमित रूप से स्कूल जाने के लिए प्रेरित करेगी। प्रश्न पत्र में कौशल आधारित प्रश्नों की संख्या बढ़ाई जाएगी। कौशल आधारित प्रश्नों के कारण छात्र विषय को याद करने की बजाय गहराई से समझने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

CBSE बोर्ड परीक्षा नियम बदलने का उद्देश्य?

  • कुल अंकों के 40 प्रतिशत का मूल्यांकन आंतरिक क्षमता के आधार पर किया जाएगा।
  • छात्रों के पढ़ाई के दौरान किए गए प्रोजेक्ट्स, असाइनमेंट, प्रस्तुति, कक्षा परीक्षण, और अन्य कई प्रकार की गतिविधियों को इसके दायरे में लाया गया है।
  • छात्रों को अंतिम परीक्षा के दौरान दबाव कम होगा और छात्र पूरे साल थोड़ी-थोड़ी मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करेंगे।
  • नए नियम के अनुरूप, परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता को देखते हुए प्रैक्टिकल परीक्षाएं लेने के लिए बाहर से परीक्षकों को आमंत्रित किया जाएगा।
  • अब डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की जाएगी, जिससे कॉपी में होने वाली सभी त्रुटियों को कम किया जाएगा।

CBSE बोर्ड परीक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण बातें।

  • 10वीं बोर्ड परीक्षा दो चरणों में ली जाएगी।
  • पहले चरण की परीक्षा फरवरी से मार्च के बीच आयोजित की जाएगी। दूसरे चरण की परीक्षा मई में आयोजित होगी।
  • दोनों चरणों की परीक्षा का रिजल्ट अलग-अलग घोषित किया जाएगा। हालांकि, प्रैक्टिकल परीक्षा का मूल्यांकन सिर्फ एक बार किया जाएगा।
  • परीक्षा की शुल्क बढ़ाई जाएगी।
  • परीक्षा की शुल्क बढ़ाई जाएगी।
  • दोनों बार एक ही परीक्षा केंद्र को आवंटित किया जाएगा

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा नियम क्यों बदला गया?

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए थे।

  • नई शिक्षा नीति (NEP) को 2020 में लागू किया गया था। इस नीति में परीक्षा प्रणाली को अधिक व्यावहारिक बनाया गया है।
  • "सीबीएसई बोर्ड" को नई परीक्षा नीति के अनुरूप लाने के लिए इस नियम को लागू किया गया था।
  • अब कौशल-आधारित और विश्लेषणात्मक प्रश्नों की संख्या बढ़ा दी गई है।
  • पहले ज्यादातर छात्र याद करके परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का जवाब देते थे। लेकिन अब प्रश्नों को समझकर उनका उत्तर देंगे।
  • पारंपरिक शिक्षा प्रणाली सिर्फ किताबों तक सीमित थी। लेकिन अब 50 प्रतिशत प्रश्न कौशल आधारित जोड़े गए हैं। इससे छात्र अपनी तर्क शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता को विकसित कर सकेंगे।