चीन, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश सहित भारत के कई राज्यों में 7 जनवरी 2025 को भूकंप ने दस्तक दीथी। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, चीन के तिब्बत प्रांत में सुबह 9:05 बजे (IST अनुसार सुबह 6:30 बजे) भूकंप का झटका महसूस किया गया था। 7.1 तीव्रता के भूकंप का केंद्र तिब्बत के शिजांग में धरती से करीब 10 किलोमीटर नीचे बताया गया था।
चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी "शिन्हुआ" के मुताबिक, चीन में कुल 126 लोगों की मौत हुई थी, और 188 लोग घायल हुए थे। भूकंप का असर भूटान और नेपाल तक पहुंच गया था। हालांकि, वहां किसी जान और माल का नुकसान नहीं हुआ था।
चीन में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद तिब्बत के डिंगरी काउंटी के झाकुन गांव में घायलों को बचावकर्मियों द्वारा सहायता दी जा रही थी। नीचे उसकी तस्वीर देखें।
न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, चीन में लगभग 1 हजार से अधिक घरों को काफी नुकसान पहुंचा था।
बिहार तक पहुंचा भूकंप का असर
चीन में आए 7.1 तीव्रता के भूकंप का असर भारत के कई राज्यों तक पहुंच था। सिक्किम, उत्तराखंड, दिल्ली - NCR, और बिहार के कई जिलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। 6 जनवरी को दिल्ली - NCR में भूकंप आया। भूकंप का केंद्र नई दिल्ली था जिसकी गहराई 5 किलोमीटर बताया गया था। दिल्ली में आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.0 मापी गई थी।
दिल्ली - NCR मे आए भूकंप के लगभग 2 घंटे बाद बिहार के पटना, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, समस्तीपुर, और सिवान जिला में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। यहां भी 4.0 तीव्रता का भूकंप लगभग 8 सेकंड तक महसूस किया गया था। लेकिन, दिल्ली - NCR और बिहार दोनों जगहों पर कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ था।
भूकंप क्यों आता है?
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार - धरती की सतह 7 बड़े और अन्य कई छोटे-छोटे टेक्टोनिक प्लेटों से मिलकर बनी है। सभी प्लेट्स अपनी सतह पर घूमती रहती हैं। कई बार ये प्लेट आपस में टकराती हैं और इसके टकराने से एक ऊर्जा उत्पन्न होती है। उस ऊर्जा से एक दबाव जन्म लेता है, और जब वह दबाव बाहर निकलना चाहता है, तब प्लेटों में कंपन होती हैं, जिससे भूकंप आता है।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) भारत सरकार की एक नोडल एजेंसी (किसी कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार संस्थान) है जो पृथ्वी, वायुमंडल, और पर्यावरण विज्ञान से संबंधित शोध [(अनुसंधान) रिसर्च] करती है। यह एजेंसी भूकंप गतिविधियों की निगरानी और भूकंप से संबंधित शोध करती है।
भूकंप कैसे आता है?
धरती की सतहों में तीन लेयर होते हैं। पहला लोअर, दूसरा मिडिल और तीसरा अपर लेयर। धरती के बीच वाले लेयर को कोर (Core) कहा जाता है, जो पूरी तरह मेटल का बना होता है। इसके ऊपर आता है मैंटल (Mantle), जिसका पूरा स्वरूप पथरिला होता है। सबसे ऊपर आता है क्रस्ट (Crust), जिसे हम अपनी आँखों से देखते हैं, जहाँ हम घर बनाते हैं और रहते हैं।
क्रस्ट अलग-अलग टुकड़ों से बना होता है, जिसे हम टेक्टोनिक प्लेट कहते हैं। सभी प्लेट्स जिग्सॉ की तरह आपस में एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं; ये प्लेट अलग-अलग दिशाओं और स्पीड से इधर-उधर बिखरती हैं फिर जुड़ती भी हैं। कुछ प्लेट्स आपस में रगड़ करती हैं तो कुछ एक-दूसरे से दूर होती हैं और कई बार आपस में लॉक भी हो जाती हैं, जिसे हम "पॉट लाइन" कहते हैं।
जब सभी प्लेट अधिक समय तक आपस में गलत तरीके से टकरातीहैं, तो इससे फ्रिक्शन पैदा होता है और ऊर्जा का निर्माण होता है। जब वह ऊर्जा अधक बनतीहै, तो वह बाहर निकलना चाहती है, और बाहर निकलते समय वह ऊर्जा एक वेव का रूप ले लेती है, जिसे हम भूकंप कहते हैं।
भूकंप कितना खतरनाक है?
रिक्टर स्केल के माध्यम से भूकंप की तीव्रता मापी जाती है।
- 0 से 2.9 की तीव्रता से सिर्फ हल्का कंपन होता है।
- 3 से 4.9 की तीव्रता पर दीवारों पर टंगी फ्रेम या फोटो गिर सकती हैं।
- 5 से 6.9 की तीव्रता पर मकान की नींव दरक सकती है, और दीवारों में दरार आ सकती है।
- 7 से 8.9 की तीव्रता पर मकान गिर जाते हैं।
- 9 से ज्यादा की तीव्रता पर ज्यादा तबाही होती है, धरती फट जाती है और सुनामी जैसी आपदा आती है।
दुनिया में भूकंप का सबसे भयावह दृश्य
- पृथ्वी पर एक वर्ष में 1 लाख से ज्यादा बार भूकंप आता है। लेकिन उनमें से लगभग 100 ऐसे होते हैं जो भीषण तबाही लाते हैं।
- 15 जनवरी 1934 को भारत के बिहार राज्य में 8.1 तीव्रता का भूकंप भीषण तबाही के साथ आया था, उस समय 30 हजार लोगों की मौत हुई थी।
- 1920 में चीन में भूकंप के बाद लैंडस्लाइड हुआ था, जिसमें 2 लाख लोगों की मृत्यु हो गई थी।
- 1960 में चिली में भूकंप से 6000 लोगों की मौत हुई थी, भूकंप की तीव्रता 9.6 थी।
- 1970 में पेरू में भूकंप के बाद हिमस्खलन हुआ था, जिससे 18 हजार लोगों की मौत हो गई थी।
- 26 दिसंबर 2004 को इंडोनेशिया में भूकंप आया था। हिंद महासागर में सुनामी आ गई थी, जिसमें लगभग 2.5 लाख लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।


